ग्रहण दोष से हैं परेशान? सूर्य और चंद्र ग्रहण दोष के लिए पहनें ये रुद्राक्ष (Grahan Dosh Remedies)
वैदिक ज्योतिष में ग्रहण दोष (Grahan Dosh) को बहुत ही अशुभ माना गया है। जब भी जन्मकुंडली में सूर्य या चंद्रमा ग्रह, राहु या केतु ग्रह के साथ बैठ जाते हैं, तो इससे ग्रहण दोष का निर्माण होता है।

जिस भी व्यतियों की कुंडली में यह दोष बनता है, तो उसका सारा जीवन भर संघर्ष से काटना पड़ता है। कभी तो उनके अन्दर आत्मविश्वास की कमी देखी जाती हैं, तो कभी किसी न किसी कारणों से मानसिक तनाव से घिरा हुआ रहता है। लेकिन शिव महापुराण में इस ग्रहण दोष (Grahan Dosh) जैसी समस्या का भी एक बहुत ही सरल और शक्तिशाली समाधान बताया गया है— केवल उसके अनुकूल रुद्राक्ष धारण करना।
आज Mukhirudraksha.org द्वारा इस आर्टिकल में हम जानेंगे और बतांगे कि सूर्य ग्रहण दोष और चंद्र ग्रहण दोष के लिए कौन सा रुद्राक्ष (Rudraksha) आपको धारण करना चाहिए।
1. सूर्य ग्रहण दोष और उसका उपाय (Surya Grahan Dosh)
जब जन्म कुंडली में सूर्य ग्रह (Sun) और राहु ग्रह (Rahu) या केतु ग्रह (Ketu) एक साथ होते हैं, तो इस स्थिति में सूर्य ग्रहण दोष बनता है।
- लक्षण: इस दोष के होने से व्यक्ति की अपने पिता से अनबन, सरकारी कार्यों में बाधा आना, आत्मविश्वास की कमी, हड्डियों या आँखों की समस्या आदि।
- उपाय (रुद्राक्ष): इस सूर्य ग्रहण दोष की प्रभावता को दूर या शांत करने के लिए व्यक्ति को 1 मुखी रुद्राक्ष या 12 मुखी रुद्राक्ष (इनमे से कोई एक) धारण करना चाहिए।
- क्यों पहनें: 1 मुखी रुद्राक्ष और 12 मुखी रुद्राक्ष दोनों ही सूर्य ग्रह को प्रबल करते हैं। इसके साथ में आपको एक 8 मुखी रुद्राक्ष (राहु का प्रतीक) भी पहन लें, तो बना हुआ दोष पूरी तरह शांत होने लगता है।
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2. चंद्र ग्रहण दोष और उसका उपाय (Chandra Grahan Dosh)
जब कुंडली में चंद्रमा ग्रह (Moon) और राहु/केतु ग्रह की युति एक साथ होती है, तो चंद्र ग्रहण दोष बनता है।
- लक्षण: इसके होने से व्यक्ति के अत्यधिक मानसिक तनाव (Depression) रहता हैं, माता जी का खराब स्वास्थ्य ख़राब रहता है, घबराहट का होना, नींद ना आना और कोई भी निर्णय लेने में कठिनाई होती हैं।
- उपाय (रुद्राक्ष): इस दोष का प्रभाव कम करने यानि की शांति के लिए 2 मुखी रुद्राक्ष धारण करना सर्वोत्तम माना जाता है।
- क्यों पहनें: 2 मुखी रुद्राक्ष को अर्धनारीश्वर का स्वरूप माना जाता है और चंद्रमा ग्रह का का कारक भी माना जाता है। यह व्यक्ति के मन को शांत करता है और राहु ग्रह के बुरे प्रभाव को निष्क्रिय करने का कार्य करता है। बेहतर परिणाम चाहने के लिए इसे चांदी की धातु में मढ़वाकर पहना चाहिए।
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ग्रहण दोष निवारण पेंडेंट (Grahan Dosh Nivaran Combination)
ज्योतिषियों के अनुसार, इस ग्रहण दोष में राहु/केतु ग्रह मुख्य विलेन की मूमिका निभाते हैं। इसलिए इसका सबसे शक्तिशाली उपाय है एक रुद्राक्ष का बना हुआ कॉम्बिनेशन (Combination) पहनना:
- सूर्य ग्रहण के लिए: 12 मुखी रुद्राक्ष + 8 मुखी रुद्राक्ष।
- चंद्र ग्रहण के लिए: 2 मुखी रुद्राक्ष + 8 मुखी रुद्राक्ष।
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यह संयोजन धारण करने से केवल दोष खत्म नहीं होगा, बल्कि व्यक्ति का कैरियर और स्वास्थ्य दोनों में भी चमत्कारिक सुधार देखने को मिलता है।
धारण करने की विधि (How to Wear)
कोई सा भी रुद्राक्ष तभी असर करता है जब उसे प्राण-प्रतिष्ठित यानिकी सिद्ध करके पहना जाए:
- दिन: सूर्य ग्रहण दोष के लिए रविवार के दिन और चंद्र ग्रहण दोष के लिए सोमवार का दिन पहना शुभ होता है।
- शुद्धि: सबसे पहले रुद्राक्ष को कच्चे दूध मिश्रित गंगाजल से धोकर पवित्र कर लें। इसके बाद नीचे बताये गये मंत्र का जाप करें।
- मंत्र:
- सूर्य के लिए: “ॐ ह्रीं नमः” या “ॐ सूर्याय नमः”।
- चंद्रमा के लिए: “ॐ नमः” या “ॐ सोम सोमाय नमः”।
- प्रार्थना: अब भगवान शिव का ध्यान करके इस दोष से मुक्ति पाने की प्रार्थना करते हुए अपने गले में धारण करें।
निष्कर्ष (Conclusion)
यह ग्रहण दोष होने पर व्यक्ति की प्रगति पर एक ‘ताला’ सा लग जाता है, और इसे खोलने की रुद्राक्ष उसकी ‘चाबी’ है। अपने जीवन को अंधकार से निकालकर प्रकाश की ओर ले जाने के लिए सही और असली रुद्राक्ष का चुनाव करके धारण करना चाहिए।
परन्तु एक बात का ध्यान रहे, की ग्रहण दोष के उपाय के लिए हमेशा आपको असली और लैब-टेस्टेड रुद्राक्ष ही प्रयोग करना चाहिए। नकली रुद्राक्ष पहनने से आपका समय, विशवास और धन तीनों की बर्बादी होती है।
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