घर में रोज होते हैं झगड़े या नहीं हो रही तरक्की? ये ‘पितृ दोष’ है! बस पहनें ये 1 रुद्राक्ष, पूर्वज देंगे खजाना
क्या आपके घर पर रोजाना पैसा तो आता रहता है, परन्तु लगातार बीमारी या क्लेश में चला जाता है? क्या आपके शादी लायक बेटे-बेटियों के विवाह में किसी न किसी कारणों से अड़चनें आ रही हैं? या फिर संतान बाधा के कारणों से वंश आगे नहीं बढ़ रहा?

तो फिर आप, सावधान हो जाइए! क्योंकी ऊपर बताई गई समस्या के अनुसार ज्योतिष शास्त्र में, ये सब सामान्य समस्याएं नहीं हैं। यह इशारा करता है कि आपके पूर्वज (Ancestors) आपसे नाराज चल रहे हैं। इसे ही ‘पितृ दोष’ के नाम से जाना जाता है।
जब किसी व्यक्ति के पितृ दोष का प्रभाव होने लगता है, तो इंसान को राजा से रंक बना देता है। लेकिन आपको घबराएं नहीं हैं! शिव महापुराण में इस समस्या का एक ऐसा “रामबाण उपाय” बताया गया है, जो आपके नाराज पूर्वजों को शांत करने में सहयोग करते है और आपके बिगड़े हुए सभी कामों को बना देते है।
पितृ दोष का काल: 10 मुखी और 12 मुखी रुद्राक्ष
ज्योतिष शास्त्र में पितृ दोष निवारण के लिए दो रुद्राक्ष सबसे शक्तिशाली माने जाते हैं। नीचे जानेगे की आपके लिए कौन सा मुखी रुद्राक्ष सही है:
1. 10 मुखी रुद्राक्ष: पूर्वजों की मुक्ति का द्वार
अगर आपको लगता हैं की आपके घर में हर समय या कभी कभी “अशांति और भूतों का डर” बना रहता है, तो 10 मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।
- क्यों है खास: यह भगवान विष्णु का स्वरूप माना जाता है। और आपको पता होगा की, विष्णु जी ही मोक्ष के दाता हैं।
- चमत्कार: व्यक्ति द्वारा पहनते ही उनके पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है। और घर में मौजूद सभी नेगेटिव एनर्जी (Negative Energy) दूर भागने लगती है और घर में परिवार सदस्यों में आपस में प्रेम और प्यार बढ़ता है।
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2. 12 मुखी रुद्राक्ष: सूर्य का तेज (पिता का कारक)
यदि आपको “सरकारी नौकरी, मान-सम्मान या आपके पिता की सेहत” में गिरावट या दिक्कत आ रही है, तो 12 मुखी रूद्राक्ष पहनें।
- क्यों है खास: ज्योतिष शास्त्र में सूर्य ग्रह को पिता और पूर्वजों का कारक माना जाता है।
- चमत्कार: यह व्यक्ति के पितृ दोष को ‘पितृ आशीर्वाद’ में बदल देता है। इसे पहनने के बाद व्यक्ति का अपने समाज में नाम और मान सम्मान में वृद्धि होने लगती है और रुका हुआ पैसा जिसे वापस मिलने की उम्मीद नहीं वो मिलने लगता है।
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⚠️ “पितृ शांति कवच” (सबसे तेज असर वाला उपाय)
जिन व्यक्ति को पितृ दोष से कारणों से ज्यादा पीड़ित हैं, तो केवल एक रुद्राक्ष का दाना धारण करना काफी नहीं होगा। विद्वान पंडितों के अनुसार, आपको एक विशेष “त्रिशक्ति कॉम्बिनेशन” पहनना चाहिए।
👉 विधि: 10 मुखी + 12 मुखी + 14 मुखी रुद्राक्ष (या सिद्ध की हुई 5 मुखी माला में एक 10 मुखी दाना पिरोएं)।
इसे पहनने के बाद आप देखेंगे कि पितृ दोष के कारणों से जो काम बरसों से अटका था, वह अचानक कैसे पूरा होने लगते हैं।
कब और कैसे पहनें? (नियम जानना जरूरी है)
गलत विधि द्वारा पहना गया कोई भी रुद्राक्ष अपना फल नहीं देता हैं।
- शुभ दिन: पितृ दोष के उपाय कारणों से पहना गया रुद्राक्ष को अमावस्या (Amavasya) के दिन धारण करना सबसे श्रेष्ठ माना गया है।
- प्राण प्रतिष्ठा: रुद्राक्ष को कच्चे दूध मिश्रित गंगाजल में काले तिल मिलाकर धोकर पवित्र करें।
- मंत्र: इसके बाद पूजा स्थल पर रखकर 108 बार “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करके अपने गले में धारण करें।
निष्कर्ष: पूर्वजों को दोष न दें, उपाय करें!
कभी भी पितृ दोष से डरने की जरूरत नहीं है। बल्कि उनको समझने की जरुरत हैं क्योंकी आपके पूर्वज आपका बुरा कभी नहीं चाहते, वे बस आपका ध्यान और सेवा चाहते हैं। 10 मुखी रुद्राक्ष धारण करें और अपने जीवन को खुशियों से भर लें।
याद रखें: बाजार या यदा कदा मिलने वाले प्लास्टिक के मनके पितृ दोष दूर नहीं करेंगे। हमेशा लैब सर्टिफाइड (Lab Certified) जावा/नेपाली रुद्राक्ष ही पहनें।
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